Monday, May 15, 2017

भुई आंवला

भुई आंवला (country gooseberry)

भुई आंवले का छोटा सा पौधा होता है . यह बरसात के दिनों में खरपतवार की तरह हर जगह उगा हुआ नज़र आता है . इसकी पत्तियों की डंडी के नीचे बिल्कुल नन्हे नन्हे आंवले की तरह के फल जैसे लगे होते हैं . इसीलिये इस पौधे को भूमि आंवला या भू धात्री भी कहा जाता है .
Liver या यकृत की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है . लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा . Bilurubin बढ़ गया है , पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पढ़े को जड़ों समेत उखाडकर , उसका काढ़ा सुबह शाम लें . सूखे हुए पंचांग का 3 ग्राम का काढ़ा सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ bilurubin ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी .
अगर वर्ष में एक महीने भी  इसका काढ़ा ले लिया जाए तो पूरे वर्ष लीवर की कोई समस्या ही नहीं होगी.
Hepatitis -B और C के लिए यह रामबाण है . भुई आंवला +श्योनाक +पुनर्नवा ; इन तीनो को मिलाकर इनका रस लें . ताज़ा न मिले तो इनके पंचांग का काढ़ा लेते रहने से यह बीमारी  बिलकुल ठीक हो जाती है .
कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को  चबा जाते हैं . इसमें शरीर के विजातीय तत्वों को दूर करने की अद्भुत क्षमता है . मुंह में छाले हों तो इनके पत्तों का रस चबाकर निगल लें या बाहर निकाल दें .  . यह  मसूढ़ों के लिए भी अच्छा है और  मुंह पकने पर भी लाभ करता है . स्तन में सूजन या गाँठ हो तो इसके पत्तों का पेस्ट लगा लें पूरा आराम होगा .
जलोदर या ascitis में लीवर की कार्य प्रणाली को ठीक करने के लिए 5 ग्राम भुई आंवला +1/2 ग्राम कुटकी +1 ग्राम सौंठ का काढ़ा सवेरे शाम लें .  खांसी में इसके साथ तुलसी के पत्ते मिलाकर  काढ़ा बनाकर लें . यह किडनी के infections भी खत्म करती है . इसका काढ़ा किडनी की सूजन भी खत्म करता है . प्रदर या प्रमेह की बीमारी भी इससे ठीक होती है .
पेट में दर्द हो और कारण न समझ आ रहा हो तो इसका काढ़ा ले लें . पेट दर्द तुरंत शांत हो जाएगा . ये digestive system को भी अच्छा करता है . शुगर की बीमारी में घाव न भरते हों तो इसका पेस्ट पीसकर लगा दें . इसे काली मिर्च के साथ लिया जाए तो शुगर की बीमारी भी ठीक होती है .
             Pus cells बढने पर भी इसे लिया जा सकता है . खुजली होने पर इसके पत्तों का रस मलने से लाभ होता है . पुराना बुखार हो और भूख कम लगती हो तो , इसके साथ मुलेठी और गिलोय मिलाकर ; काढ़ा बनाकर , लें . रक्त प्रदर की बीमारी होने पर इसके साथ दूब का रस  मिलाकर 2-3 चम्मच प्रात: सायं लें. आँतों का infection होने पर या ulcerative colitis होने पर इसके साथ दूब  को भी जड़ सहित उखाडकर , ताज़ा ताज़ा आधा कप रस लें . Bleeding 2-3 दिन में ही बंद हो जाएगी .

Saturday, May 13, 2017

आपके घर में हो ये 5 चीजें तो लक्ष्मी कभी नहीं आएगी


वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में रखे हुए टूटे-फूटे सामान, बर्तन, प्रतिमाएं, उपकरण आदि उस घर में रहने वालों पर नकारात्मक असर डालते हैं। इनसे घर का माहौल खराब होकर गृह-क्लेश का वातावरण बनता है, साथ में मां महालक्ष्मी भी नाराज होती है। शास्त्रों में कहा भी गया है जिस घर में टूटा-फूटा, खराब सामान होता है, वहां देवी लक्ष्मी कभी निवास नहीं करती।

अक्सर हमारे घरों में टूटे-फूटे बर्तन रखे रहते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह बड़ा ही अशुभ वास्तु दोष है जो घर में नकारात्मकता को बढ़ाता है। इसलिए घर में टूटे बर्तन न रखें। यही कारण है कि मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दीवाली पर घर के सभी टूटे-फूटे बर्तन बाहर निकाल दिए जाते हैं।

घर में टूटा हुआ दर्पण रखने से घर में नेगेटिव एनर्जी फैलती है तथा घर के सभी सदस्यों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। अतः घर, गाड़ी या अन्य स्थानों पर रखे टूटे शीशों को तुरंत ही बाहर कर दें।

यदि पति-पत्नी का पलंग टूटा हुआ होता है तो उनके वैवाहिक जीवन में परेशानियां आने लगती हैं और उनके आपसी संबंध भी तनावपूर्ण हो जाते हैं। घर में वैवाहिक दाम्पत्य जीवन की सुख-शांति के लिए पलंग के टूटते ही या तो उसकी तुरंत मरम्मत करवा लेनी चाहिए या उसे बदल लेना चाहिए।

कुछ लोग खराब घड़ियां, इलेक्ट्रानिक सामान आदि को भी घर में रखते हैं। उनका मानना होता है कि समय आने पर सही करवा लेंगे। परन्तु यह घर में नेगेटिव एनर्जी को इकट्ठा करता है, जिससे घर में सदस्यों के बीच आपसी झगड़े होने लगते हैं तथा माहौल खराब होता है।


घर में कभी भी कोई टूटी, फटी हुई तस्वीर या प्रतिमाएं नहीं रखनी चाहिए। यह भी वास्तु दोष माना जाता है। खास तौर पर किसी देवी-देवता, धर्म स्थल, खुशहाल परिवार, किसी रमणीय स्थान, बच्चे आदि की तस्वीरें, प्रतिमाएं तो कटने-फटने या टूटने के बाद तुरंत ही हटा देनी चाहिए।