Wednesday, June 25, 2014

कमर दर्द

प्रायः कमर दर्द से सभी का सामना होता है | आजकल की व्यस्त जीवन शैली में कई बार शरीर में कमर दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है | यह अधिकतर उन लोगों में होता है जो अधिक समय तक खड़े होकर,बैठकर या गलत तरीके से बैठकर और लेटकर कार्य करते हैं | अधिक मुलायम गद्दे पर बैठने और सोने से भी कमर दर्द हो जाता है | कई बार किसी कारण से कमर की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न हो जाता है जिसकी वजह से कमर में दर्द होता है जो बहुत कष्टपूर्ण होता है | कमर दर्द के और भी कारण हो सकते हैं जैसे ठण्ड लगने से,पानी में भीगने से अथवा और किसी रोग की वजह से |
कमर दर्द का विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार -
१- सौंठ के चूर्ण को अलसी के तेल में पका लें | इस तेल से कमर की मालिश करने से कमर दर्द में लाभ होता है |
२- अजवायन को एक पोटली में बाँध लें | फिर इस पोटली को तवे पर गर्म करें तथा इससे कमर की सिकाई करें ,लाभ होगा |
३- आधा चम्मच सौंठ का चूर्ण सुबह-शाम गर्म दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है |
४- लगभग ५ ग्राम सौंफ,१० ग्राम तेजपात और दस ग्राम अजवायन को एक लीटर पानी में उबालें | जब १०० ग्राम शेष रह जाए तब इसे ठंडा करके पी लें | इससे ठण्ड के कारण उत्पन्न हुए कमर दर्द में राहत मिलती है |
५- अरण्ड के पत्ते पर एक तरफ सरसों का तेल लगाकर तवे पर हल्का सा सेंक लें | फिर इसे तेल की तरफ से कमर पर बाँध लें | यह प्रयोग रात्रि में सोते समय करना चाहिए | सुबह तक कमर दर्द में बहुत आराम मिलता है |
६- आधा लीटर सरसों के तेल में १२५ गर्म लहसुन की पोथियों को कूटकर डालें | फिर उसे लहसुन के जलने तक गर्म करें और ठंडा होने पर छानकर शीशी में भर लें| इस तेल की मालिश से कमर दर्द मिट जाता है |

Monday, June 2, 2014

आम

1. ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है
आम में प्रचूर मात्रा में विटामिन पाए जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। हाई ब्लड प्रेशर के रोगी के लिए आम एक प्राकृति उपचार है, क्योंकि इसमें पोटेशियम (156 मिलीग्राम में 4 प्रतिशत) और मैग्निशियम (9 मिलीग्राम में 2 प्रतिशत) भारी मात्रा में पाए जाते हैं।

2. कैंसर के खतरे को कम करता है और कोलेस्ट्रोल की मात्रा घटाता है
आम में एक घुलनशील आहार संबंधी फाइबर पेक्टिन पाया जाता है। पेक्टिन ब्लड कोलेस्ट्रोल लेवल को कम करने में प्रभावी रूप से कार्य करता है। यह हमें ग्रंथि में होने वाले कैंसर से भी बचाता है।

3. वजन बढ़ाने में मददगार
आम का सेवन करना वजन बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है। 150 ग्राम आम में करीब 86 कैलोरी ऊर्जा होती है, जो हमारे शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित कर ली जाती है। इतना ही नहीं, आम में स्टार्च पाया जाता है, जो सूगर में परिवर्तित होकर अंतत: वजन को बढ़ाता है।

4. पाचन प्रक्रिया में सहायक 
आम अपच और एसीडीटी जैसी समस्याओं को भी दूर करता है। आम में पाए जाने वाले एंजाइम्स भोजन को पचाने में मदद करते हैं। 

5. एनीमिया का उपचार 
जो लोग एनियामा से ग्रसित हैं, उनके लिए आम काफी फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें प्रचूर मात्रा में आइरन पाया जाता है। नियमित और पर्याप्त रूप से आम का सेवन शरीर में खून की मात्रा बढ़ा देता है, जिससे एनीमिया जैसी बीमारी दूर रहती है।

6. गर्मवती महिला के लिए लाभदायक 
गर्मवती महिला को आयरन की विशेष जरूरत होती है। इसलिए उनके लिए आम काफी लाभदायक होता है। यूं तो डॉक्टर आयरन की गोली लेने की सलाह देते हैं, पर अगर आप चाहें तो आयरन से भरपूर आम के जूस का सेवन भी कर सकते हैं।

7. मुंहासे को रखे दूर 
आम त्वचा पर होने वाले मंहासे पर भी प्रभावी रूप से असर करता है। यह मुंहासे के बंद पड़े छिद्रों को खोल देता है। एक बार जब यह छिद्र खुल जाते हैं, तो मुंहासों का निर्माण अपने-आप बंद हो जाता है। देखा जाए तो त्वचा के बंद पड़े छिद्रों को खोलना ही मुंहासों से छुटकारा पाने से सबसे अच्छा तरीका है। पर इसके लिए आपको नियमित आम खाने की जरूरत नहीं है। आप आम के गूदे को त्वचा पर लगाएं और 10 मिनट बाद धो लें।

8. समय से पहले बुढ़ापे को रोकता है 
आम में बड़ी मात्रा में विटामिन A और विटामिन C पाए जाते हैं, जो कि शरीर के अंदर कोलाजेन प्रोटीन के निर्माण में सहायक होते हैं। कोलाजेन ब्लड वेसल और शरीर के कनेक्टिव टिशू को सुरक्षित रखता है, जिससे त्वचा की उम्र ढलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

9. मस्तिष्क को बनाए स्वस्थ्य 
आम में विटामिन B-6 प्रचूर मात्रा में पाया जाता है, जो कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

10. शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाता है 
गाजर की तरह आम में भी बीटा-केरोटीन और कार्टेन्वाइड उच्च मात्रा में पाया जाता है। आम में पाए जाने वाले यह तत्व शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता को बेहतर और मजबूत बनाते हैं।

डेन्गू

डेन्गू बुखार के लिये बहुत से लोगों ने फोन करके "टिप्स" और इलाज के लिये पूछा है कि एलोपैथी के इलाज के बाद भी उन्की तकलीफ नही ठीक हुयी है और जब डेन्गू बुखार अपना असर चरम सीमा पर हो तो लजिमी है कि उसके बचाव और इलाज के लिये सही और सटीक और अचूक इलाज बताया जाय /
आयुर्वेद की औषधियां और इसका इलाज डेन्गू के लिये ;
१- यह खुराक एक पूर्ण वयस्क वयक्ति के लिये है / ब्च्चों के लिये आधी या चौथायी खुराक दे /
एक गोली महासुदर्शन घन वटी
एक गोली सप्त पर्ण घन वटी
एक गोली महाज्वरान्कुश रस
एक गोली आनद भैरव रस

इन चार गोलियों की मिलकर एक खुराक दवा है / इसे सादे पानी से अथवा गुनगुने पानी से अथवा चाय अथवा दूध अथवा तुलसी  की चाय अथवा तुलसी -अदरख की चाय अथवा शहद से रोग की तेजी के अनुसार दो दो घन्टे के अन्तराल से अथवा तीन या चार घन्टे के अन्तराल से देना चाहिये / एक या दो दिन में बुखार और इसके उपद्रव ठीक हो जाते है /

मूंग

मूंग से हम सब बहुत अच्छी तरह परिचित हैं | मूंग की दाल द्विदल धान्य है और समस्त दलहनों में अपने विशेष गुणों के कारण अच्छी मानी जाती है | मूंग काले,हरे,पीले,सफ़ेद और लाल अनेक तरह की होती है | रोगियों के लिए मूंग बहुत श्रेष्ठ बताई जाती है | मूंग की दाल से पापड़,बड़ियां व पौष्टिक लड्डू भी बनाये जाते हैं | मूंग की दाल खाने में शीतल व पचने में हलकी होती है | 
विभिन्न रोगों में मूंग का उपयोग -

१- चावल और मूंग की खिचड़ी खाने से कब्ज दूर होता है | खिचड़ी में घी डालकर खाने से कब्ज दूर होकर दस्त साफ़ आता है |

२- मूंग को सेंककर पीस लें | इसमें पानी डालकर अच्छी तरह से मिलाकर लेप की तरह शरीर पर मालिश करें | इससे ज्यादा पसीना आना बंद हो जाता है |

३- मूंग की छिलके वाली दाल को दो घंटे के लिए पानी में भिगो दें| इसके बाद इसे पीसकर गाढ़ा लेप दाद और खुजली युक्त स्थान पर लगाएं,लाभ होगा |

४- टाइफाइड के रोगी को मूंग की दाल बनाकर देने से लाभ होता है,लेकिन दाल के साथ घी और मसालों का प्रयोग बिलकुल न करें |

५- मूंग को छिलके सहित खाना चाहिए | बुखार होने पर मूंग की दाल में सूखे आंवले को डालकर पकाएं | इसे रोज़ दिन में दो बार खाने से बुखार ठीक होता है और दस्त भी साफ़ होता है |

मोटापा [Obesity]

मोटापा [Obesity]
मोटापा एक बीमारी है जो अनेक कारणों से होती है यथा व्यायाम न करना , हर समय आराम करना , अधिक मात्रा में चिकने व मीठे पदार्थों का सेवन आदि | कुछ लोगों में मोटापा वंशानुगत भी होता है | मोटापे के कारण रक्तचाप बढ़ जाता है और वायु संचरण में रुकावट महसूस होती है| मोटापे के कारण त्वचा फूल जाती है जिससे शरीर पूर्ण रूप से वायु ग्रहण नहीं कर पाता | अधिक चर्बी के कारण हृदय पर भी प्रभाव पढता है जिससे हृदय की गति धीमी हो जाती है|
मोटापे से छुटकारा पाने के लिये जीवनशैली में परिवर्तन की आवश्यकता होती है | आईये जानते हैं इससे छुटकारा पाने के कुछ सरल उपाय -
१- मोटापे से पीड़ित व्यक्ति को प्रातःकाल उठकर टहलना चाहिए तथा आसान व प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करना चाहये | ऐसा करने से वजन बहुत तेज़ी से घटता है |
२- २५ मिलीलीटर में नींबू के रस में २५ ग्राम शहद मिलाकर १०० मिलीलीटर गुनगुने पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से मोटापा दूर होता है |
३- सूखा धनिया,मिश्री और मोटी सौंफ को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच सुबह पानी के साथ लेने से अधिक चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है | मधुमेह के रोगी यह प्रयोग न करें |
४- तुलसी के पत्तों का रस १० बूँद और शहद २ चम्मच को एक गिलास पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से मोटापा कम होता है |
५- टमाटर और प्याज में थोड़ा सा सेंधा नमक और थोड़ी सी पीसी हुई काली मिर्च डालकर भोजन से पहले सलाद के रूप में खाने से भूख कम लगती है और मोटापा कम होता है |
६- रात को सोने से पहले १५ ग्राम त्रिफला चूर्ण को हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इस पानी को छानकर एक चम्मच शहद मिलकर पी लें | इससे मोटापा जल्दी दूर होता है |

एक नीम और सौ हकीम

नीम का पेड़ बहुत ही उपयोगी है. इसकी जड़ से लेकर टहनी, फूल-पत्ती और फल तक सभी औषधीय गुणों से भरपूर है. यह सभी के लिए कल्प वृक्ष के समान है. नीम की कड़वाहट ही उसका सबसे बड़ा गुण है. गर्मी के समय सभी पेड़ों के पत्ते झड़ जाते हैं. लेकिन नीम हरा भरा रहता है.पहले के समय में अनाज और कपडो में नीम की पत्तियां ही रखी जाती थी ताकि अनाज और कपडो में कीड़े ना हो.तो आईये जाने नीम के औषधीय गुणों के बारे में.-    

रक्त शुद्धि में - नीम आमतौर पर कीटाणुओं को खत्म करने वाला होता है. प्रतिदिन नीम की पांच कोमल पत्तियां चबाकर खाने से सभी रोग दूर हो जाते हैं, खून शुद्ध हों जाता है और संक्रामक रोगों से बचा जा सकता है. इसके अलावा दांतों से जुड़े सारे रोग खत्म हो जाते हैं और आवाज सुरीली हो जाती है.

दांतों के लिए - 
नीम की दातून करने से दांत साफ, मजबूत एवं चमकदार और रोग मुक्त हो जाते हैं. 

नीम की पत्तियों को सुखाकर जलाने पर उसके धुंए से मक्खी, मच्छर भाग जाते हैं.नीम मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को दूर रखने में अत्यन्त सहायक है. जिस वातावरण में नीम के पेड़ रहते हैं, वहाँ मलेरिया नहीं फैलता है. नीम के पत्ते जलाकर रात को धुआं करने से मच्छर नष्ट हो जाते हैं और विषम ज्वर (मलेरिया) से बचाव होता है.नीम के पत्ते कीढ़े मारते हैं, इसलिये पत्तों को अनाज, कपड़ों में रखते हैं.

त्वचा सम्बन्धी रोगो में - 
नीम की पत्तियों को उबालकर उस पानी से नहाने और आहार-विहार संतुलित रखने से त्वचा से जुड़े सारे रोग खुजली,अकौता एवं सोरायसिस आदि में लाभ मिलता है.नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुन्सियों पर लगाने से पूरा आराम और लाभ मिलता है.

डायबिटीज में - नीम के तेल को कई औषधियों में प्रयोग करते हैं. आयुर्वेद में नीम वात-पित्त-कफ-तीनों रोगों को दूर करने वाला है.  पित्ती (एलर्जी), त्वचा रोगों एवं डायबिटीज में नीम के पत्तों का रस पीने से बहुत फायदा होता है.

कान के दर्द में  - 
नीम की पत्तियों के रस और शहद को २:१ के अनुपात में पीने से पीलिया में फायदा होता है, और इसको कान में डालने कान के विकारों में भी फायदा होता है.
नीम के तेल की ५-१० बूंदों को सोते समय दूध में डालकर पीने से ज़्यादा पसीना आने और जलन होने सम्बन्धी विकारों में बहुत फायदा होता है.

बबासीर में - नीम के बीजों के चूर्ण को खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में काफ़ी फ़ायदा होता है.

पेट में कीड़े होने पर - यदि पेट में कीड़े हो, तो (बड़ा हो या बच्चा) नीम की नई कोपलें के रस में शहद मिलाकर चाटें कीड़े समाप्त हो जायेंगे. पानी में नीम के तेल की कुछ बूंदें डालकर चाय की तरह पी जायें बच्चे को 5बूंद बड़ों को 8 बूंद इससे ज्यादा नहीं लेना है. नीम के पत्ते जरा सी हींग के साथ पीस लें और चाट जायें पेट के कीड़े नष्ट हो जायेंगे.

बालों के लिए - यदि बाल काले करना हो, तो नीम को पानी में उबाल कर सर धोयें. कम से कम एक महीना नतीजा आप के सामने होगा.नीम के तेल की दो बूंद नाक में डालने से बालों को झड़ने और सफेद होने से रोका जा सकता है. रूसी से छुटकारा पाने के लिए रात को सोते समय बालों में नीम के तेल की मालिश करें.

कुष्ट रोग में - कुष्ट रोग के लिये नीम एक वरदान के समान है इस रोग का इलाज नीम से हो सकता है. कुष्ट रोग फूट जाये तो नीम के नीचे सोयें, नीम खाओ, नीम बिछाकर सोयें. प्रतिदिन नीम के सौ पत्तों का चूर्ण, जल के साथ सेवन किया जाए तो किसी प्रकार का 6 मास तक का जीर्ण कुष्ठ रोग समाप्त हो जाता है. नीम के पत्र एवं हरड़ चूर्ण का सेवन करने से कुष्ठ रोग समाप्त हो जाते हैं. 

बुखार में - बुखार, पुराना बुखार, टाईफाइड हो, तो 20-25 नीम के पत्ती 20-25 काली मिर्च एक पोटली में बांधकर आधा किलो पानी में उबालें पानी खौलने दें ढक्कन लगाकर रखें, ठंडा होने पर चार हिस्सा बनाकर सुबह-शाम दो दिन तक पिलायें फिर देखे बुखार उतरा या नही. इस विधि से तो पुराना से पुराना बुखार भी उतर जाता है.

स्त्रियों के लिए - प्रसव होने पर प्रसूता के घर के दरवाजे पर नीम की पत्तियाँ तथा गोमूत्र रखने की ग्रामीण परम्परा मिलती है. ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि घर के अन्दर दुष्ट आत्माएं अर्थात संक्रामक कीटाणुओं वाली हवा न प्रवेश करे. नीम पत्ती और गोमूत्र दोनों में रोगाणुरोधी (anti bacterial)गुण पाये जाते हैं.

आयुर्वेद मत में नीम की कोमल छाल ४ माशा तथा पुराना गुड २ तोलाडेढ़ पाव पानी में औंटकरजब आधा पाव रह जाय तब छानकर स्त्रियों को पिलाने से रुका हुआ मासिक धर्म पुन: शुरू हो जाता है. 

प्रसूता को बच्चा जनने के दिन से ही नीम के पत्तों का रस कुछ दिन तक नियमित पिलाने से गर्भाशय संकुचन एवं रक्त की सफाई होती हैगर्भाशय और उसके आस-पास के अंगों का सूजन उतर जाता हैभूख लगती हैदस्त साफ होता हैज्वर नहीं आता

कोलेस्ट्रोल - नीम एक रक्त-शोधक औषधि हैयह बुरे कैलेस्ट्रोल को कम या नष्ट करता है. नीम का महीने में १० दिन तक सेवन करते रहने से हार्ट अटैक की बीमारी दूर हो सकती है. लीवर की बीमारी में भी नीम पत्ती का सेवन लाभदायक पाया गया है.

दमा रोग में - नीम का शुद्ध तेल ३० से ६० बूंद तक पान में रखकर खाने से दमा से छुटकारा मिलता है. नीम के २० ग्राम पत्ते को आधा लीटर पानी में उबालकर जब एक कप रह जाय,कुछ दिन पीते रहने से भी दमा जड़ से नष्ट होता है.नीम के फूलों का सेवन करने से कफ नष्ट होता है.

पथरी में - नीम की पत्तियों की राख २ माशा जल के साथ नियमित कुछ दिन तक खाते रहने से पथरी गलकर नष्ट हो जाती है.
कई वर्षों तक लगातार हर साल १०-१५ दिन तक नीम की पत्तियों का सेवन किये हुए व्यक्ति को सर्पबिच्छू आदि के विष का असर नहीं होता. नीम बीज का चूर्ण गर्म पानी के साथ पीने से भी विष उतरता है.