Friday, June 1, 2012

तुतलाना एवं हकलाना


तुतलाना एवं हकलाना

बच्चे यदि एक ताजा हरा आँवला रोजाना कुछ दिन चबाएँ तो तुतलाना और हकलाना मिटता है। जीभ पतली और आवाज साफ आने लगती है। मुख की गर्मी भी शांत होती है। 
बादाम की गिरी सात, काली मिर्च सात, दोनो को कुछ बूंदे पानी के साथ घिसकर चटनी से बना लें और इसमे जरा-सी मिश्री पिसी हुई मिलाकर चाटें। प्रात: खाली पेट कुछ दिन लें।
स्पष्ट नहीं बोलने और काफी ताकत लगाने पर भी हकलाहट दूर न हो तो दो काली मिर्च मुँह में रखकर चबायें-चूसे। यह प्रयोग दिन में दो बार लम्बे समय तक करे।

हकलाना, तुतलाना (STAMMERING)


हकलाना, तुतलाना
(STAMMERING)

परिचय :-
          हकलेपन की आदत होने पर रोगी को बोलने व किसी से बात करने में बहुत परेशानी होती है। हकलापन में व्यक्ति कभी बोलते समय बीच का शब्द भूल जाता है, कभी शुरू का शब्द बोलना भूल जाता है और कभी जोर-जोर से बोलता है। यह रोग छोटे बच्चों में विशेषकर 2 से 5 साल के बच्चों में माता-पिता के द्वारा बच्चों को बार-बार डांटने के कारण पैदा होता है। यदि कोई बच्चा प्रारम्भ के कुछ वर्षों में साफ बोलने में कुछ कठिनाई महसूस करता है या बोलते समय तुतलाता रहता है तो उसे हकलाना या तुतलाना रोग नहीं कहा जा सकता है क्योंकि बाद में चलकर बच्चा साफ बोलने लगता है।
कारण :-
          हकलापन होने के कई कारण हो सकते हैं। भावानात्मक ठेस (आघात) पहुंचना, जबान तालु व होठ के विकास में पूर्ण सामंजस्य न होना, बाल्यावस्था के दौराना पीड़ा होना, डर या उत्तेजना होना आदि। विकास की गति धीमी होने के कारण भी हकलापन व तोतलापन आ सकता है। पचास से अधिक आयु वाले व्यक्ति में पक्षाघात होने के बाद यह रोग उत्पन्न हो सकता है।
लक्षण :-
          इस रोग में रोगी बोलने में असमर्थ रहता है, कभी-कभी शुरू के शब्द को ही कई बार दोहरा देता है। कोई भी बात असंगत व असम्बद्ध हो तो वह नहीं कह पाता है। बोलने में वह कई प्रकार से परेशानी महसूस करता है।
तुतलापन व हकलापन से पीड़ित रोगी का उपचार करने के साथ ही कुछ अन्य उपाय :-
  1. तुतलापन से पीड़ित रोगी को चाहिए कि वह जो भी वाक्य या शब्दों को बोले उसे पहले मन में दोहरा लें।
  2. प्रतिदिन आराम से शांतपूर्णक शब्दों को बोलने की कोशिश करें और हमेशा बोलते समय तनाव से मुक्त रहकर ही बोलें।
  3. कुर्सी पर सीधें बैठे व सांस लेते समय सांस को ऊपर उठाएं। आगे झुकते समय रोकें व हाथ नीचे लाते समय सांस को धीमें से बाहर निकालें।
  4. बोलने की मांस-पेशियों को नियंत्रत करने हेतु स्पीक थेरैपी तकनीक का उपयोग करें।
  5. आराम एवं हकलाना रोकने के लिए स्वयं की आवाज को सुनने की कोशिश करें।
  6. हकलापन को दूर करने के लिए समूह में गाना गाने, नाटक करने से लाभ मिलता है।
  7. हकलाना दूर करने के लिए अपने आत्म विश्वास को जगाएं इससे लाभ मिलेगा।
  8. यदि आपके बच्चे को बोलने में कठिनाई हो या किसी शब्द को बोलने में परेशानी हो तो उसको इसका ऐहसास मत दिलाएं उसके रोग को उपचार करवाएं।