Wednesday, March 30, 2011

मन्त्र-जाप में नियमों

पहला विधान-
1 पद्मासन या सुखासन में बैठें।
2 अपने दायें हाथ को घी का दीपक एवं जल का पात्र (लोटा) रखें।
3 गुरू मन्त्र का 5 बार जाप करें।
4 गणेश मंत्र का 5 बार जाप करें।
5 गायत्री मंत्र का 28/108 बार जाप करें।
6 अपने इष्ट के मंत्र का आवश्यकता अनुसार जाप करें।
7 अपने इष्ट देव की आरती करें।
8 क्षमा प्रार्थना एवं शान्ति पाठ करें।

दूसरा विधान-
1 पद्मासन या सुखासन में बैठें।
2 अपने दायें हाथ को घी का दीपक एवं जल का पात्र (लोटा) रखें।
3 गुरू मन्त्र का 5 बार जाप करें।
4 गणेश मंत्र का 5 बार जाप करें।
5 रक्षा मंत्र का 11 बार जाप करें।
6 नवग्रह मंत्र का 3 बार जाप करें।
7 गायत्री मंत्र का 28/108 बार जाप करें।
8 अपने इष्ट के मंत्र का आवश्यकता अनुसार जाप करें।
9 अपने इष्ट देव की आरती करें।
10 क्षमा प्रार्थना स्तुति एवं शान्ति पाठ करें।

तीसरा विधान-
1 पद्मासन या सुखासन में बैठें।
2 अपने दायें हाथ को घी का दीपक एवं जल का पात्र (लोटा) रखें।
3 आचमन और संकल्प करें।
4 गुरू मन्त्र का 5 बार जाप करें।
5 श्री संकटनाशन गणेशस्तोत्रम् का 1 बार पाठ करें।
6 श्रीबटुक भैरव अष्टोत्तरशत नामावलिः का 1 बार पाठ करें।
7 नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें।
8 गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें।
9 अपने इष्ट के मंत्र का आवश्यकता अनुसार जाप करें।
10अपने इष्ट देव की आरती करे एवं पुष्पाँजलि करें।
11 क्षमा प्रार्थना स्तुति एवं शान्ति पाठ करें।

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